Saturday, 13 July 2013

कौमी एकता का हमें हार चाहिए

कौमी एकता का हमें हार चाहिए


 एक माँ का दोनों को दुलार चाहिए 

बैर नहीं आपस में प्यार चाहिए


आरती-नमाज में न खून हो सके 

कौमी एकता का हमें हार चाहिए 

कौमी एकता का हमें हार चाहिए


मंदिर या मस्जिद अजाब नहीं हो 

बाँटे जो दिलों को वो किताब नहीं हो
 
दिल में किसी के कोई घाव नहीं हो 

मानव में जाति भेद-भाव नहीं हो 

भारत की एकता के तार चाहिए 

गंगा नहीं संगम की धार चाहिए 

कौमी एकता का हमें हार चाहिए


नफरत की आग में जले न कोई आज 

सोमनाथ मंदिर या आगरा का ताज
 
सर्वधर्म बगिया में लगे न कोई आग 

लुट सके न शांति यज्ञ में कोई सुहाग 

भिन्नता में एकता बहार चाहिए 

टूटे जो कभी न वह कतार चाहिए 

कौमी एकता का हमें हार चाहिए


नानक, रहीम, राम की यह भूमि है 

ख्वाजा अजमेर कहीं बृज-भूमि है 

गीत गूंजते हैं मीरा, रसखान के 

गाँधी औ' सुभाष की ये कर्म-भूमि है 

सिर्फ जिंदगी का हमें सार चाहिए 

राष्ट्र धर्म के हमें सुविचार चाहिए 

कौमी एकता का हमें हार चाहिए

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