एक कली खिली चमन में
एक कली खिली चमन में
बन गई थी वो फूल
बड़ा गर्व हुआ अपने में
सब को गई थी वो भूल
कहा चमन ने फिर उससे
यहाँ रहता स्थिर नहीं कोई
मत कर तू गुमान इतना
आज तो यौवन है पर
कल जब तू ठूंठ हो जाएगी
तब कोई तेरे दर्द में
सहानुभूति नहीं दिखलाएगा
हंसकर मिलजुलकर मिल
फिर से सब में खो जा तू
अलग बनाया अस्तित्व जो तूने
अपने से तू भी जाएगी
कोई माली, राहगीर ही
तुझको तोड़ ले जाएगा
मिट जाएगा जीवन तेरा फिर
अन्तकाल, तू पछताएगी

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